अहिल्या स्थान एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक मंदिर है।
यह स्थान दरभंगा जिला अंतर्गत कमतौल रेलवे स्टेशन से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर अहियारी गांव में स्थित है।
इस मंदिर की स्थापना महाराज छत्र सिंह और महाराजा रुद्र सिंह के राज्य के दौरान वर्ष 1662-1682 में हुई थी।
अहिल्या गौतम ऋषि की पत्नी थी और गौतम ऋषि ने एक बार गुस्से में अहिल्या को पत्थर बनने का श्राप दे दिया था । लेकिन बाद में जब उन्हें अपने गलती का एहसास हुआ तो उन्होंने इस श्राप के निवारण के लिए ये उपाय बताया की जब स्वंय भगवान राम इस पत्थर को स्पर्श करेंगे तो वो पुनः पत्थर से नारी के स्वरूप में आ जायेगी।
रामायण के अनुसार जब भगवान राम जनकपुर जा रहे थे तो उनके पांव इस पत्थर को छू गया और वह पत्थर औरत में बदल गयी ।
यहाँ हर साल रामनवमी और विवाह पंचमी के अवसर पर बड़े मेले लगते हैं ।
इस मंदिर का धार्मिक के साथ साथ ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व भी है।
यह मंदिर प्राचीन भारतीय वास्तुकला का उत्कृष्टम नमूना है।
यह मंदिर हमें एहसास दिलाता है की वास्तव में हमारी संस्कृति कितनी ज्यादा समृद्ध है और हमारे पूर्वज कितने विद्वान और प्रतिभाशाली थे।
साथ ही इस मंदिर को भारत का पहला राम जानकी मंदिर होने का गौरव भी प्राप्त है।
इस मंदिर की एक अनोखी परंपरा है जो अमतौर पर इसे दूसरे मंदिर से बिलकुल अलग करती है। यहां की मान्यता है जो लोग यहां बैगन चढ़ाते हैं उनकी सारी मनोकामना पूरी होती है।
यहां मन्नत के तौर पर भी बैगन माना जाता है।
रामनवमी के दिन तो यहाँ बैगन का पहाड़ जैसा बन जाता है लोग काफी दूर दूर से आते हैं और जिनकी मनोकामना पूर्ण हो गयी होती है वो बैगन चढ़ाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *