श्रृंगी ऋषि आश्रम – सिंघिया ( जिला मधुबनी , बिस्फी प्रखंड)

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ऋषि श्रृंगी आश्रम रामायणकालीन मिथिला की ऐतिहासिक धरोहर है। यह मंदिर मधुबनी जिला के बिस्फी प्रखंड के अंतर्गत आता है।
दरभंगा रेलवे स्टेशन से इसकी दूरी लगभग 17 किलोमीटर है , और नजदीकी रेलवे स्टेशन टेकटार है । दो तरफ से नदियों से घिरा यह जगह बहुत ही खूबसूरत और रमणीय है ।
इस जगह का अपन एक अलग धार्मिक ऐतिहासिक और पुरातात्त्विक महत्व है। पुरातत्वविदों के अनुसार इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग अपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण है। इस तरह की शिवलिंग पुरे मिथिला में शायद २-३ जगह ही अवस्थित है।
श्री श्रृंगी ऋषि की शादी राजा दशरथ की एकलौती पुत्री शांता से हुआ था। इस तरह श्रृंगी ऋषि भगवान श्री राम चंद्र के बहनोई थे। श्रृंगी ऋषि के पिता का नाम विभाण्डक था। और विभाण्डक ऋषि के पिता यानी की श्रृंगी ऋषि के दादा जी कश्यप ऋषि थे जो की ब्रह्मा के मानस पुत्र भी हैं

उस समय राजा दशरथ के कोई भी पुत्र नहीं थे । दशरथ और उनकी रानियां इस बात को लेकर चिंतित रहते थे कि पुत्र नहीं होने पर राज-पाट कौन संभालेगा ।
उनके इस चिंता के निवारण के लिए ऋषि वशिष्ट ने एक उपाय बताया की वो अपने दामाद श्रृंगी ऋषि से पुत्र प्राप्ति यज्ञ करवाएं। लेकिन इस यज्ञ की एक समस्या ये भी थी की जो भी यह यज्ञ करवाएगा उसका पुरे जीवन भर का पुण्य इस यज्ञ के आहुति में नष्ट हो जायेगा।
पहले तो श्रृंगी मुनि ने साफ़ शब्द में राजा दशरथ को मना कर दिया की वो इस तरह का कोई भी यज्ञ नहीं करवाएंगे। लेकिन पत्नी शांता के कहने पर वह ये यज्ञ करवाने को तैयार हो गए।
यज्ञ संपन्न के बाद श्रृंगी ऋषि के पूरी जिंदगी के पुण्य के बदले राजा दशरथ के चारो पुत्र राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म हुआ।

ऐसा माना जाता है कि ऋंग ऋषि और शांता का वंश ही आगे चलकर सेंगर राजपूत बना। सेंगर राजपूत को ऋंगवंशी राजपूत कहा जाता है।

श्रृंगी मुनि के जन्म को लेके दो अलग अलग तरह की कहानियां सुनने को मिलती है

पहली कहानी कुछ इस तरह है की :
श्रृंगी मुनि के पिता विभाण्डक नदी में स्नान कर रहे थे, तब नदी में उनका वीर्यपात हो गया और उस जल को एक हिरणी ने पी लिया था जिसके फलस्वरूप ऋंग ऋषि का जन्म हुआ था। क्यों की हिरणी से श्रृंगी मुनि का जन्म हुआ और उनके मस्तक पर एक छोटा सा सिंघ भी था इस लिए उनका नाम श्रृंगी रखा गया।

दूसरी कहानी ये है की :
दूसरी कहानी कुछ इस तरह है की एक बार विभाण्डक ऋषि के कठोर तपस्या से डर कर इंद्र ने अपनी अप्सरा उर्वशी को उनके तपस्या को भंग करने को भेजा । मुनि विभाण्डक उर्वशी में प्रेम जाल में पर गए। ऋषि विभाण्डक और उर्वशी के संयोग से ऋषि श्रृंगी का जन्म हुआ ।

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